जे रहीम उत्तम प्रकृति , का करि सकत कुसंग। चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग।।

By exam_gyan at 14 days ago • 0 collector • 4 pageviews

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दृष्टान्त

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अर्थान्तरन्यास

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