समर तेरो भाग्य यह कहा सराहयो जाय । पक्षी करि फल आस जो ,तुहि सेवत नित आय।

By exam_gyan at 17 days ago • 0 collector • 5 pageviews

ब्याजस्तुति

ब्याजनिन्दा

विभावना

अनुप्रास

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