चरन धरत चिन्ता करत, भावत नींद न शोर।सुबरन को खोजत फिरत, कवि व्यभिचारी चोर।।

By exam_gyan at 17 days ago • 0 collector • 3 pageviews

यमक

उत्प्रेक्षा

दृष्टान्त

श्लेष

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