अजौ तरयौना ही रह्यों, श्रुति सेवत इक अंग।नाक बास बेसिर लह्यौं, बसि मुक्तन के संग।।

By exam_gyan at 17 days ago • 0 collector • 3 pageviews

रुपक

उत्प्रेक्षा

यमक

श्लेष

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