तू रुप है किरण में, सौन्दर्य है सुमन में। तू प्राण है पवन में, विस्तार है गगन में।।

By exam_gyan at 17 days ago • 0 collector • 4 pageviews

रुपक

उल्लेख

यमक

अतिशयोक्ति

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