हैं गरजते घन नहीं बजते नगाड़े। विद्युल्लता चमकी न कृपाण जाल से।।

By exam_gyan at 17 days ago • 0 collector • 4 pageviews

उत्प्रेक्षा

यमक

अपहुति

रुपक

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