“मेखलाकार पर्वत अपार, अपने सहस्त्र दृग सुमन फाड़ अवलोक रहा है बार-बार, नीचे जल में निज महाकार।।”

By exam_gyan at 17 days ago • 0 collector • 6 pageviews

अतिशयोक्ति

मानवीकरण

संदेह

उत्प्रेक्षा

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