“जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत की सोय। बारे उजियारों करे,बढे अंधेरो होय।।”

By exam_gyan at 17 days ago • 0 collector • 7 pageviews

रूपक

संदेह

श्लेष

उत्प्रेक्षा

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