बढ़त-बढ़त सम्पति सलिल मन-सरोज बढ़ जाए। घटत-घटत फिर न घटै करु समूल कुम्हिलाय।।

By exam_gyan at 17 days ago • 0 collector • 8 pageviews

रुपक

यमक

उल्लेख

विभावना

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